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अपने लहजे और फ़िक्र-ओ- फ़न के लिए उर्दू अदब में हमेशा याद किए जाएंगे मुज़फ़्फर हनफ़ी साहब

अपने लहजे और फ़िक्र-ओ- फ़न के लिए उर्दू अदब में हमेशा याद किए जाएंगे मुज़फ़्फर हनफ़ी साहब
                
                                                         
                            फ़र्क़ नहीं पड़ता हम दीवानों के घर में होने से 
                                                                 
                            
वीरानी उमड़ी पड़ती है घर के कोने कोने से 

अपनी इस कम-ज़र्फ़ी का एहसास कहाँ ले जाऊँ मैं 
सुन रक्खा था उलझन कुछ कम हो जाती है रोने से 


''मुज़फ़्फ़र हनफ़ी आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के बड़े शायर हैं। अपने लहजे और तेवर में सबसे अलग मुज़फ्फ़र हनफ़ी को नई बात पुराने अंदाज़ में और पुरानी बात नए असलूब में कहने का हुनर खूब आता है।''
 - गोपीचंद नारंग

मशहूर शायर और लेखक मुज़फ़्फ़र हनफ़ी साहब बीती 10 अक्टूबर को नहीं रहे। अदब में वह कादिर उल कलाम शायर के रूप में जाने जाते थे। उनकी पहचान एक ऐसे शायर की थी जिसे किसी भी खयाल को शेर में बांधने का हुनर आता था। ज़बान और बयान दोनों पर  मुकम्मल पकड़ रखने वाले शायर और लेखक मुज़फ़्फ़र हनफ़ी साहब की गिनती आधुनिक शायरी की बुनियाद रखने वालों में होती है। आगे पढ़ें

5 वर्ष पहले

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