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कारवां आसमान की ओर चला... हमेशा जगमगाने के लिए...

गोपाल दास नीरज
                
                                                         
                            प्रेम के साथ जीवन के संघर्ष को हमेशा चुनौती देने वाले नीरज भी इस दुनिया से रुखसत हो गए। 19 जुलाई 2018 का दिन उनके लिए काल बनकर आया और उनका कारवां आसमान की ओर चल पड़ा हमेशा जगमगाने के लिए। पद्मभूषण गोपाल दास नीरज ने गुरुवार को नई दिल्ली के एम्स में दुनिया को अलविदा कहा। बीते मंगलवार को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें आगरा के लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।
                                                                 
                            

हालांकि बुधवार को उनकी तबियत में सुधार की भी खबर मिली लेकिन अंतत: उनका निधन हो गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गोपालदास को सांस लेने में तकलीफ हुई थी। जिसके कारण उन्हें पहले कमला नगर स्थित साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां कोई सुधार न होने पर उन्हें आगरा के लोटस हॉस्पिटल लाया गया। बाद में उन्हें एम्स में शिफ्ट किया गया। इटावा में जन्मे कवि गोपाल दास नीरज को कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें 1991 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 2007 में पद्मभूषण सम्मान मिला। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारती सम्मान से नवाजा।

हिंदी फिल्मों में एक से बढ़कर एक गीत लिखे...

गोपाल दास नीरज

बॉलीवुड की फिल्मों के लिए गोपाल दास नीरज ने कई मशहूर नगमे लिखे, जो आज भी लोगों की जुबां पर हैं। इसके लिए उन्हें तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड भी मिल चुका है। नीरज के कुछ प्रमुख गीतों में फूलों के रंग से दिल की कलम से, दिल आज शायर है, शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब, रंगीला रे तेरे रंग में, ओ मेरी शर्मिली, लिखे जो खत तुझे जैसे गीत शामिल हैं।

गोपाल दास नीरज का नाम सुनते ही प्रेम और विरह में डूबी लरजती सी आवाज मन के तारों को झंकृत कर देती है। फिर आप नीरज की दो-एक कविताएं और गीत पढ़कर ही मन को सुकून दे सकते हैं। नीरज की गीतों की गहराई की यह विशेषता ही कही जा सकती है। नीरज ने अपनी कलम से युवा अरमानों को जो उड़ान दी है वह लंबे शोध का विषय हो सकता है। एकांत का मौन और चीखती प्रेम की वेदना उनकी कविताओं में रह-रह कर टीस के साथ दर्द बनकर उभरती है। आंखें नम हो जाए यह नीरज को पढ़ने की शर्त है। वामपंथी आलोचकों ने हमेशा नीरज को ख्वाबों और ख्यालों का आदमी कहकर नकारा कह दिया। लेकिन नीरज ने हिंदी कविता और गीतों में जो मादक खूश्बू बिखेरी थी, उसे प्रेम और विरह में डूबा कोई शख्स ही समझ सकता है। उनके गीतों में प्रेम की पुकार है। करारे प्रहार की बजाए कोमलता और सुहावने संस्कार हैं। जो जेहन में दूर तलक बिंब की तरह उभरते रहते हैं।
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हिंदी फिल्मों में एक से बढ़कर एक गीत लिखे...

7 वर्ष पहले

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