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जब देश के राजनेताओं ने पढ़ा यह दमदार काव्य...

When indian politicians read these poetry
                
                                                         
                            राजनीति में नेताओं की आपसी नोंक-झोंक का दौर हमेशा चलता रहता है। जिसमें वह विपक्ष को जवाब देने के लिए तथ्यों और इतिहास का संदर्भ देते हैं। लेकिन कई दफ़ा स्थिति ऐसी भी बन गई जब नेताओं ने बड़े शायरों और कवियों की रचनाओं को पढ़कर अपनी बात शानदार ढंग से रखी। हम आपके लिए कुछ ऐसे दृष्टांत लेकर आए हैं जब जवाब देने के लिए नेताओं ने काव्य का सहारा लिया।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी बात को रखने के लिए शायर निदा फ़ाज़ली की ग़ज़ल संसद में पढ़ी।

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो 
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो

इधर उधर कई मंज़िल हैं चल सको तो चलो 
बने बनाये हैं साँचे जो ढल सको तो चलो

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं 
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता 
मुझे गिराके अगर तुम सम्भल सको तो चलो

यही है ज़िन्दगी कुछ ख़्वाब चन्द उम्मीदें 
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

हर इक सफ़र को है महफ़ूस रास्तों की तलाश 
हिफ़ाज़तों की रिवायत बदल सको तो चलो

कहीं नहीं कोई सूरज, धुआँ धुआँ है फ़िज़ा 
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो 

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नरेन्द्र मोदी

8 वर्ष पहले

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