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कै़फ़ भोपाली : मोहब्बत का वो रेशमी अफसाना, चलो दिलदार चलो...

कैफ भोपाली
                
                                                         
                            चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो
                                                                 
                            
हम हैं तैयार चलो 

आओ खो जाएं सितारों में कहीं 
छोड़ दें आज ये दुनिया ये ज़मीं
दुनिया ये ज़मीं
चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो
हम हैं तैयार चलो

हम नशे में हैं सम्भालो हमें तुम
नींद आती है जगा लो हमें तुम
जगा लो हमें तुम
चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो
हम हैं तय्यार चलो


अपने जमाने के अजीम फनकार कैफ़ भोपाली साहब जब नामचीन फिल्म निर्माता कमाल अमरोही की सोहबत में आए और फिल्म 'पाकीजा' के लिए उन्होंने 'चलो दिललार चलो...' लिखा और मोहम्मद रफी ने इस गीत को अपनी आवाज देकर अमर कर दिया तो जमाने को कै़फ़ साहब की तलब होने लगी। 

'पाकीजा' के लिए लिखे कालजयी गीत

फिल्म 'पाकीजा' के गीत आज भी लोग बड़ी शिद्दत से सुनते हैं, गुनगुनाते हैं। 1972 में बनी फिल्म 'पाकीजा' की कहानी एक तवायफ के इर्द-गिर्द घूमती है और उस कथानक के मद्देनज़र कै़फ़ साहब ने जो गीत लिखे मसलन 'तीरे नजर देखेंगे...' को लता जी के सुरीले कंठ ने कालजयी बना दिया- 

आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे

आप तो आँख मिलाते हुए शरमाते हैं,
आप तो दिल के धड़कने से भी डर जाते हैं
फिर भी ये ज़िद्द् है के हम ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे,
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे 

प्यार करना दिल-ए-बेताब बुरा होता है
सुनते आये हैं के ये ख्वाब बुरा होता है
आज इस ख़्वाब की ताबीर मगर देखेंगे
तीर-ए-नज़र देखेंगे, ज़ख्म-ए-जिगर देखेंगे.....


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'पाकीजा' के लिए लिखे कालजयी गीत

5 वर्ष पहले

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