रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई
- कैफ़ी आज़मी
बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई
इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया
- ख़ालिद शरीफ़
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X