रात आंखों में गुज़र जाती है
इन दिनों है ये हमारा सोना
- निज़ाम रामपुरी
इक अजब सी कैफ़ियत है इन दिनों
न ख़ुशी है और न कोई मलाल
- रुख़्सार नाज़िमाबादी
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