अक्सर नेता अपने भाषणों में कविता और शेरो-शायरी का बख़ूबी इस्तेमाल करते हैं। ऐसा वो जनता के दिल और दिमाग़ तक सीधे पहुंचने के लिए करते हैं। लेकिन, माना जाता है कि राजनीति और शायरी में छ्त्तीस का आंकड़ा है। हालांकि, इसके बावजूद भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे भी दिग्गज राजनेता हैं जिन्हें कविताओं का काफ़ी शौक़ है। इन नेताओं ने समाज और अपने मन की उथल-पुथल को व्यक्त करने के लिए समय-समय पर क़लम भी चलाई है। एक निगाह ऐसे राजनेतओं पर जो राजनीति के साथ-साथ कविताएं भी लिखीं...
नेता ही नहीं काव्य पुंज भी, अटल बिहारी वाजपेयी
सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी दिग्गज और लोकप्रिय राजनेता हैं। इसके अलावा उनके पास एक कवि हृदय भी है। पत्रकारिता से राजनीति में आए अटल बिहारी वाजपेयी ने कई मशहूर कविताएं लिखीं। उनका एक कविता संग्रह 'मेरी इक्वावन कविताएं' ख़ासा मक़बूल है। पेश है उनकी 'दो अनुभूतियां' कविता...
पहली अनुभूति
बेनकाब चेहरे हैं, दाग़ बड़े गहरे हैं
टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूं
गीत नहीं गाता हूं
लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा शीशे सा शहर
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं
गीत नहीं गाता हूं
पीठ मे छुरी सा चांद, राहू गया रेखा फांद
मुक्ति के क्षणों में बार बार बंध जाता हूं
गीत नहीं गाता हूं
दूसरी अनुभूति
गीत नया गाता हूं
टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात
प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूं
गीत नया गाता हूं
टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा,
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं
गीत नया गाता हूं
प्रधानमंत्री मोदी का कवि हृदय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लोकप्रिय नेता तो हैं हीं, साथ ही वह एक कवि भी हैं। उनका बाक़ायदा काव्य संग्रह है। हालाकिं, पीएम मोदी का यह काव्य संग्रह 2005 में गुजराती में प्रकाशित हुआ था। प्रधानमंत्री के इस कविता संग्रह का डॉ. अंजना संधीर ने ‘आंख ये धन्य है’ नाम से हिंदी में अनुवाद किया है।
पीएम मोदी की 'तस्वीर के उस पार' कविता...
तुम मुझे मेरी तस्वीर या पोस्टर में
ढूढ़ने की व्यर्थ कोशिश मत करो
मैं तो पद्मासन की मुद्रा में बैठा हूं
अपने आत्मविश्वास में
अपनी वाणी और कर्मक्षेत्र में।
तुम मुझे मेरे काम से ही जानो
तुम मुझे छवि में नहीं
लेकिन पसीने की महक में पाओ
योजना के विस्तार की महक में ठहरो
मेरी आवाज की गूंज से पहचानो
मेरी आंख में तुम्हारा ही प्रतिबिम्ब है
(गुजराती से हिंदी में अनुवाद- अंजना संधीर)
(साभार- कविता कोश)
मीरा कुमार का काव्य प्रेम
राष्ट्रपति पद की विपक्ष की उम्मीदवार और पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार का कविता प्रेम किसी से छुपा नहीं है। उन्हें कविता पढ़ना और लिखना बेहद पसंद है। उनकी सबसे पसंदीदा किताबों में कालिदास की अभिज्ञान शाकुंतलम है। पेश है उनकी मशहूर कविता की कुछ पंक्तियां...
'जहां सूरज में तपिश न हो
और रात के अंधेरे पीछे छूट जाएं
जहां तमन्नाएं उकसा न सकें
और भ्रम के घरौंदे चटकर टूट जाएं'
'जहां आस्थओं के खंडहर न हो
और बेबसी की राख पर संक्लप लहलाए'
कपिल सिब्बल की काव्य रसधारा
कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल एक वक़ील के तौर पर ख्यात हैं। लेकिन, वह एक कवि भी हैं यह कम ही लोग जानते हैं। अक्सर वह कवि सम्मेलनों में जाते हैं। इसके अलावा उनकी की दो कविताएं हिंदी फ़िल्म "दिल्ली गैंग" में इस्तेमाल की गई थीं। यह फ़िल्म दिल्ली में वरिष्ठ नागरिकों की हत्याओं पर आधारित थी।। कपिल सिब्बल की कविता की चुनिंदा पंक्तियां...
'हक मेरे दिला तू
मुझको खुदा तू
नहीं तो बता तू
करेगा फिर क्या तू
बाशिंदो से तेरे उकता चुका हूं
दिलासे मैं तेरे अकसर सुन चुका हूं
द्वार तेरे आकर मैं कब से खड़ा हूं
इंतजार करते-करते मैं थक गया हूं
जंग मेरी लड़ेगा?
फिर पता चलेगा
बिन पैसे का कोई हुक्म मान लेगा तू?'
केसरीनाथ त्रिपाठी का कविता शौक़
पश्चिम बंगाल और बिहार के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को भी कविताओं का काफ़ी शौक़ है। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे त्रिपाठी ने कविताएं भी लिखी हैं। पेश है उनकी 'अनजानी राह' कविता...
उसने मेरा परिचय कभी नहीं पूछा था
मैं अनजानी राह उसी के गांव बढ़ गया
जाने कैसे भाव उभरते उसके मुख पर
मैं झिझकेले पांव उसी की ठांव बढ़ गया
गीत व्यथा के अंतर्मन को चीर रहे थे
कातर नयनों की मैंने पढ़ ली थी भाषा
अति विषाद था मौन में इतना व्यापक मुखरित
संबंधों की देखी नूतन-सी परिभाषा
धनलक्ष्मी के बाहुपाश में, जकड़ स्वार्थ में
करुणा और मानवता रोई आर्तनाद में
सहलाने को घाव, हाथ नहीं सबके बढ़ते हैं
मरहम वाले हाथ, कभी भी जल सकते हैं
मेरे जलने से मिलती हो शीत किसी को
जीवन भर जलने का मैं संकल्प करूंगा
देखें सपने रुदन-मुक्ति के व्यक्ति-व्यक्ति के
सपनों की दुनिया से मैं संलग्न रहूंगा।
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नेता ही नहीं काव्य पुंज भी, अटल बिहारी वाजपेयी
7 वर्ष पहले
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