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जिंदगी को दिसम्बर आईना दिखाता है और जनवरी सपने दिखाती है...

2017
                
                                                         
                            बीते साल को अमरउजाला काव्य के पाठकों ने अपने-अपने शब्दों में कड़वे-मीठे अनुभवों के साथ शेयर किया है। हमनें पाठकों के इन चुनिंदा शेर और कविताओं को अपने मंच में जगह दी है। इनमें से कुछ प्रमुख प्रस्तुति हम आपकी नजर कर रहे हैं।  
                                                                 
                            
 

जिंदगी को दिसम्बर आईना दिखाता है और जनवरी सपने दिखाती है।
-जीतेंद्र प्रसाद

महीने फिर वही होंगे,सुना है साल बदलेगा..!

महीने फिर वही होंगे,सुना है साल बदलेगा..!
परिंदे फिर वही होंगे,शिकारी जाल बदलेगा...!!
वही हाकिम,वही गुरबत,वही कातिल वही गाजिब..!
न जाने कितने सालों में हमारा हाल बदलेगा...!!
-भास्कर डी साहू



चाहत के वस्ल के उम्मीद-ओ-ऐतबार में
ये साल भी गुज़र गया, तेरे इन्तेज़ार में
-राकेश राज
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महीने फिर वही होंगे,सुना है साल बदलेगा..!

8 वर्ष पहले

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