जाने किस ने थप्पड़ मारा काले बादल के चेहरे पर
मैं ने देखा है बादल को ग़ुस्से में बरसा है कितना
~ख़लील रामपुरी
ये भोग भी एक तपस्या है तुम त्याग के मारे क्या जानो
अपमान रचियता का होगा रचना को अगर ठुकराओगे
~साहिर लुधियानवी
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