रमज़ान एक पवित्र महीना होता है, चाँद के दीदार के बाद ही इसकी शुरुआत होती है। इन दिनों एक महीने के रोज़े रखे जाते हैं और ईश्वर की इबादत की जाती है।
इसी का नाम लिए जाएँगे क़यामत तक
हमारे साथ रहेगी अज़ान भी हम भी
- नबील अहमद नबील
'शाहिद' से कह रहे हो कि रोज़े रखा करे
हर माह जिस का गुज़रा है रमज़ान की तरह
-सरफ़राज़ शाहिद
क़ुबूल हो कि न हो सज्दा ओ सलाम अपना
तुम्हारे बंदे हैं हम बंदगी है काम अपना
- मुबारक अज़ीमाबादी
तू मेरे सज्दों की लाज रख ले शुऊर-ए-सज्दा नहीं है मुझ को
ये सर तिरे आस्ताँ से पहले किसी के आगे झुका नहीं है
- रफ़ीक राज़
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