रघुवीर सहाय ग़ुलाम भारत में पैदा हुए उन विरले कवियों में से एक हैं जिन्होंने जंज़ीरों में जकड़न से लेकर स्वतंत्रता तक की यात्रा के जिन पहलूओं को देखा उसी सच्चाई के साथ उस लिख भी दिया। रघुवीर ने जब होश संभाला होगा तब देश स्वतंत्र हुआ होगा। उसी देश, काल और वातावरण का वास्तविक असर उनकी काव्य- रचना पर भी पड़ा है।
उनकी कविताओं में उनके ज़हन का पुट नज़र आता है। सीधा प्रहार करते हुए वह अपनी दिली बातें रख देते हैं और संकोच नहीं करते। इससे रघुवीर का काव्य और भी विशिष्ट हो जाता है। उनकी एक कविता है ‘नेता क्षमा करें’
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‘नेता क्षमा करें’
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