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'क़िस्मत' पर चुनिंदा शायराना अल्फ़ाज़...

'क़िस्मत' पर चुनिंदा शायराना अल्फ़ाज़...
                
                                                         
                            मेरे हवास इश्क़ में क्या कम हैं मुंतशिर 
                                                                 
                            
मजनूँ का नाम हो गया क़िस्मत की बात है 
- अकबर इलाहाबादी

किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल 
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा 
- अहमद फ़राज़

हाथ में चाँद जहाँ आया मुक़द्दर चमका 
सब बदल जाएगा क़िस्मत का लिखा जाम उठा 
- बशीर बद्र आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

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