देश के कई शहर भीषण जलसंकट से झेल रहे हैं। चेन्नई में पानी के लिए लंबी लंबी कतारें लग रही हैं। पेय जल के स्रोत सूख गए हैं, गली गली में पानी के टैंकर दौड़ रहे हैं। कविताएं जो नीचे प्रस्तुत की जा रही हैं, पानी के संकट पर ही आधारित हैं।
पानी माँगे ताल
सूखी नदिया, झील पियासी
पानी माँगे ताल
मौसम के सिर चढ़कर नाचे
फिर अगिया बेताल
उल्टी सीधी शर्त लगाए
नाचे दे-दे ताली
सुलग रहा है बिरवा-बिरवा
झुलस रही हर डाली
ढूँढ़े मिले न उत्तर ऐसे
पूछे कठिन सवाल
मौन बस्तियों में पसरे हैं
आतंकी सन्नाटे
आते-जाते हवा लगाती
है लपटों के चाँटे
सहमे गली और चौराहे
सुबक रहे चौपाल
झुलसे पंख लिए गौरेया
दुबकी घर के कोने
टिके पेड़ से हाँफ रहे हैं
ये बेबस मृगछौने
मरी बिचारी सोन मछरिया
ऐसा पड़ा अकाल
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