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यौम-ए-पैदाइश: निदा फ़ाज़ली के 20 बड़े शेर

यौम-ए-पैदाइश: निदा फ़ाज़ली के 20 बड़े शेर
                
                                                         
                            

निदा फ़ाज़ली उर्दू-हिन्दी के अज़ीम शायर हैं साथ ही उन्होंने कई फ़िल्मों के लिए भी गीत लिखे हैं। उनका लिखा गीत कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता, तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है, होश वालों को ख़बर क्या आज भी लोग गुनगुनाते हैं।
पेश हैं निदा फ़ाज़ली के लिखे चुनिंदा शेर


अब किसी से भी शिकायत न रही
जाने किस किस से गिला था पहले


अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

एक महफ़िल में

एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक
जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा



ग़म है आवारा अकेले में भटक जाता है
जिस जगह रहिए वहाँ मिलते-मिलाते रहिए

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एक महफ़िल में

7 वर्ष पहले

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