आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

इश्क़ का रोग और शायरों के अल्फ़ाज...

इश्क़ का रोग और शायरों के अल्फ़ाज
                
                                                                                 
                            नये-नये प्रेम में भूख -प्यास नहीं लगती, दिल बेचैन रहता है और कहीं मन भी नहीं लगता। इश्क़ में डूबे व्यक्ति का हाल कुछ ऐसा हो जाता है, जिसे वो छुपा भी नहीं पाता और किसी को बता भी नहीं पाता। इश्क़ में इंसान अपना दिल ही नहीं बल्कि अपना दिमाग भी हार बैठता है।  मनोवैज्ञानिकों ने प्यार के लिए इंसान के दिमाग को भी दिल जितना ही कुसूरवार ठहराया है, लेकिन शायरों ने कहीं दीवानगी की हद तक इस रोग सुखद बताया तो कहीं रोग। पेश है 'प्रेम रोग' पर शायरों के अल्फ़ाज़- 
                                                                                                


इश्क़ का रोग भला कैसे पलेगा मुझ से 
क़त्ल होता ही नहीं यार अना का मुझ से 
~प्रखर मालवीय कान्हा

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब' 
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने 
~मिर्ज़ा ग़ालिब आगे पढ़ें

3 years ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X