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कुमार विश्वास की कविताओं से कुछ ‘चुनिंदा पंक्तियां’

Kumar vishwas hindi kavita
                
                                                         
                            तुम्हीं पे मरता है ये दिल, अदावत क्यों नहीं करता
                                                                 
                            
कई जन्मों से बंदी है, बगावत क्यों नहीं करता

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा
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6 वर्ष पहले

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