पति और पत्नी का रिश्ता विश्वास का रिश्ता होता है जो समय के साथ और मजबूत होता जाता है। इस रिश्ते को करवा चौथ जैसे त्यौहार और भी सींचते हैं। फिल्मों में भी ऐसे कई गीत हैं जिनके माध्यम से इस रिश्ते की मिठास को झलकाया गया है।
फ़िल्म: मेरा साया (1966)
संगीत: मदन मोहन
गीतकार: राजा मेहदी अली खान
गायक: मो.रफ़ी
आपके पहलू में आकर रो दिये
दास्तान-ए-ग़म सुनाकर रो दिये
आपके पहलू में...
ज़िन्दगी ने कर दिया जब भी उदास
आ गये घबरा के हम मंज़िल के पास
सर झुकाया, सर झुकाकर रो दिये
आपके पहलू में आकर...
शाम जब आँसू बहाती आ गई
हर तरफ़ ग़म की उदासी छा गई
दीप यादों के जलाकर रो दिये
आपके पहलू में आकर...
ग़म जुदाई का सहा जाता नहीं
आपके बिन अब रहा जाता नहीं
प्यार में क्या-क्या गँवाकर रो दिये
दास्तान-ए-ग़म सुनाकर रो दिये
आपके पहलू में आकर...
फ़िल्म: ज़ख्म (1998)
संगीत: एम. एम. क्रीम
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक: अलका याग्निक
तुम आये तो आया मुझे याद
गली में आज चाँद निकला
जाने कितने दिनों के बाद
गली में आज चाँद निकला
गली में आज...
ये नैना बिन काजल तरसे
बारह महीने बादल बरसे
सुनी रब ने मेरी फ़रियाद
गली में आज...
आज की रात जो मैं सो जाती
खुलती आँख सुबह हो जाती
मैं तो हो जाती बस बरबाद
गली में आज...
मैंने तुमको आते देखा
अपनी जान को जाते देखा
जाने फिर क्या हुआ नहीं याद
गली में आज...
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गली में आज चांद निकला
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