पहले भी इस जंगल से
एक बार मैं गुज़रा था
- मोहम्मद अल्वी
इस घर की वीरानी का
जंगल जैसा हुलिया है
- बिल्क़ीस ख़ान
सहरा जंगल सागर पर्बत
इन से ही रस्ता मिलता है
- ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
ख़्वाहिश के चंगुल से आगे
हैरत के जंगल को देखा
- इमरान शमशाद
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