प्रिय के संभावित आगमन के स्वागत की मधुर कल्पनाओं से सराबोर है ये कविता। महाकवियित्री महादेवी वर्मा के इन शब्दों को जो चाहे वो गा सकता है। यह किसी पद्य की विलक्षणता है कि उसे शबरी भी अपने राम के लिए गा सकती है और इस समय का युवा भी अपने प्रेम के लिए गुनगुना सकता है। ऐसी अवस्था जो मन के तार झंकृत कर दे, उल्लास भर दे तिस पर आसुओं का दुर्गम संयोग यह प्रेम की वह स्थिति है जहाँ प्रेमी/प्रेयसी का आगमन हो रहा हो। महादेवी जी ने इस कविता में भावों का जो संपुट डाला है वो अद्भुत है।
जो तुम आ जाते एक बार...
कितनी करूणा कितने संदेश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग
आँसू लेते वे पद पखार
जो तुम आ जाते एक बार
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कितनी करूणा कितने संदेश...
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