भरे बाज़ार में सच की दुकानों पर है सन्नाटा
तिजारत झूट की चमकी है मक्कारी की बातें हैं
- हिना रिज़्वी
वक़्त के तूफ़ानी सागर में क्रोध कपट के रेले हैं
लेकिन आस के माँझी हर लहज़ा मौजों से खेले हैं
- अफ़ज़ल परवेज़
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