भरे बाज़ार में सच की दुकानों पर है सन्नाटा
तिजारत झूट की चमकी है मक्कारी की बातें हैं
- हिना रिज़्वी
वक़्त के तूफ़ानी सागर में क्रोध कपट के रेले हैं
लेकिन आस के माँझी हर लहज़ा मौजों से खेले हैं
- अफ़ज़ल परवेज़
लोग ऐसे कि सीने की कपट शीशे पे लिख दें
हम ऐसे कि पत्थर को भी पत्थर न कहा जाए
- महशर बदायुनी
मेरी बातें सीधी-सादी मक्कारी से भरे हुए तुम
मेरे पास तो सच्चाई है झूट-कपट से बंधी नहीं हूँ
- गिरिजा व्यास
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