आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

‘झूठ’ पर मशहूर शायरों के 20 चुनिंदा शेर...

‘झूठ’पर  ये हैं 20 बेहतरीन शेर
                
                                                         
                            सच्चाई और इमानदारी का रास्ता कठिन जरूर होता है लेकिन यही रिश्तों में भरोसा पैदा करता है। मामला चाहे इश्क़ का हो या आपसी रिश्तों का, किसी न किसी रूप में झूठ हर जगह पसरा हुआ है। झूठ से भरोसा टूटता है और लोग परेशान होते हैं, बिखरते हैं, टूट जाते हैं। लेकिन जब कोई रचनाकार/कवि या शायर इस तरह की परिस्थिति को झेलता तो वह अपने जज़्बातों को कविता या शायरी में ढालता है। शेरो-शायरी की श्रृंखला में आज पेश है ‘झूठ’ पर मशहूर शायरों के कुछ शेर- 
                                                                 
                            

सीख रहा हूँ मैं भी अब मीठा झूठ बोलने का हुनर, 
कड़वे सच ने हमसे, ना जाने, कितने अज़ीज़ छीन लिए। 
-अज्ञात 

झूट पर उस के भरोसा कर लिया 
धूप इतनी थी कि साया कर लिया 
- शारिक़ कैफ़ी

वो झूट बोल रहा था बड़े सलीक़े से 
मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता 
- वसीम बरेलवी

झूट के आगे पीछे दरिया चलते हैं 
सच बोला तो प्यासा मारा जाएगा 
- वसीम बरेलवी

मैं तुम पर हर बार भरोसा करता हूँ
इतना सच्चा झूठ तुम्हारा होता है
- सचिन शालिनी
आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर