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Hindi Diwas 2024: 'हिंदी' भाषा पर विभिन्न कवियों की कविताओं के अंश

'हिंदी' भाषा पर विभिन्न कवियों की कविताओं के अंश...
                
                                                         
                            करते हैं तन-मन से वंदन, जन-गण-मन की अभिलाषा का
                                                                 
                            
अभिनंदन अपनी संस्कृति का, आराधन अपनी भाषा का।

यह अपनी शक्ति सर्जना के माथे की है चंदन रोली
माँ के आँचल की छाया में हमने जो सीखी है बोली
यह अपनी बँधी हुई अंजुरी ये अपने गंधित शब्द सुमन
यह पूजन अपनी संस्कृति का यह अर्चन अपनी भाषा का।
- सोम ठाकुर

पड़ने लगती है पियूष की शिर पर धारा
हो जाता है रुचिर ज्योति मय लोचन-तारा
बर बिनोद की लहर हृदय में है लहराती
कुछ बिजली सी दौड़ सब नसों में है जाती
आते ही मुख पर अति सुखद जिसका पावन नाम ही
इक्कीस कोटि-जन-पूजिता हिन्दी भाषा है वही

जिसने जग में जन्म दिया औ पोसा, पाला
जिसने यक यक लहू बूँद में जीवन डाला
उस माता के शुचि मुख से जो भाषा सीखी
उसके उर से लग जिसकी मधुराई चीखी
जिसके तुतला कर कथन से सुधाधार घर में बही
क्या उस भाषा का मोह कुछ हम लोगों को है नहीं

- अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' 
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एक वर्ष पहले

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