कुमार विश्वास का नाम आज हिंदी के बड़े कविओं में शुमार होता है। वह अक्सर मंच पर तरन्नुम में अपनी कविताएं सुनाते हैं। वह अक्सर मुशायरों में भी शामिल होते हैं, कहा जा सकता है कि वह वहां हिंदी का प्रतिधिनित्व करते नज़र आते हैं। हिंदी दिवस के अवसर पर पढ़िए उनकी लिखी कविताओं से विशेष पंक्तियां
तुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी है
तीर पार कान्हा से दूर राधिका-सी है
रात की उदासी को याद संग खेला है
कुछ गलत ना कर बैठें मन बहुत अकेला है
औषधि चली आओ चोट का निमंत्रण है
बाँसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण है
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सम्बन्धों को अनुबन्धों को परिभाषाएँ देनी होंगी
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