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मैं पल दो पल का शायर हूं...साहिर की रुमानियत भुलाए नहीं भूलेगी

साहिर लुधियानवी
                
                                                         
                            हिंदी फिल्मों में साहिर लुधियानवी ने इश्क को बड़े ही सुहावने अंदाज में पेश किया है। उनके शब्दों से मोहब्बत ने हर मोड़ में एक नया मुकाम पाया है। उनके गीतों ने फिल्मों को सुपरहिट होने में मुख्य भूमिका निभाई है। इश्क शब्द को जीने वाले साहिर का अंदाज हमेशा रुमानियत से सराबोर रहा। उनके अधिकांश हिंदी गीतों में मखमली मुलायम शब्द मोहब्बत का हसीन एहसास लिए हुए हैं। फिल्मी गानों में उर्दू शायरी को उन्होंने जो स्थान दिया है वह किसी और गीतकार के लिए संभव नहीं था। साहिर की जिंदगी के किस्से लोगों को प्रेरणा देते हैं। उनके किस्से भी उनके गीतों की तरह ही रुमानियत से भरे थे। 
                                                                 
                            



 

साहिर का जीवन बड़ी मुफलिसी में बीता

साहिर का जीवन बड़ी मुफलिसी में बीता। साहिर के साथ उनके पिता ने काफी दुर्व्यवहार किया। पिता साहिर को बेटा मानते ही नहीं थे। साहिर की मां को भी वह पीटते थे। साहिर ने मां के पक्ष में खड़े होते हुए पिता के खिलाफ गवाही भी दी थी। इससे पिता और उनके बीच काफी रोष बढ़ गया। साहिर जब गीत लिखते थे तो उसमें वह डूब जाते थे। 
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साहिर का जीवन बड़ी मुफलिसी में बीता

8 वर्ष पहले

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