औरत हूँ मगर सूरत-ए-कोहसार खड़ी हूँ
इक सच के तहफ़्फ़ुज़ के लिए सब से लड़ी हूँ
-फ़रहत ज़ाहिद
चराग़ बन के जली थी मैं जिस की महफ़िल में
उसे रुला तो गया कम से कम धुआँ मेरा
-अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
तुझ को दुनिया के साथ चलना है
तू मिरे साथ चल न पाएगा
-अंजुम रहबर
एक मुद्दत से ख़यालों में बसा है जो शख़्स
ग़ौर करते हैं तो उस का कोई चेहरा भी नहीं
-अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
मौत पहरों उदास रहती है
हम अगर ज़िंदगी से मिलते हैं
-अज़मत अब्दुल क़य्यूम ख़ाँ
हम ने सारा जीवन बाँटी प्यार की दौलत लोगों में
हम ही सारा जीवन तरसे प्यार की पाई पाई को
-अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
दो किनारों को मिलाया था फ़क़त लहरों ने
हम अगर उस के न थे वो भी हमारा कब था
-अमीता परसुराम मीता
फूल किस बे-दिली से हँसते हैं
आप किस बे-दिली से मिलते हैं
-अज़मत अब्दुल क़य्यूम ख़ाँ
हक़ीक़तें तो मिरे रोज़ ओ शब की साथी हैं
मैं रोज़ ओ शब की हक़ीक़त बदलना चाहती हूँ
- अज़रा नक़वी
उस ने मेरे नाम सूरज चाँद तारे लिख दिया
मेरा दिल मिट्टी पे रख अपने लब रोता रहा
-अज़रा परवीन
नश्तर जैसा अंदर इक चुभता काँटा है
जाने उस ने दुख बाँटा या दिल बाँटा है
-आरिफ़ा शहज़ाद
लड़कियाँ माओं जैसे मुक़द्दर क्यूँ रखती हैं
तन सहरा और आँख समुंदर क्यूँ रखती हैं
-इशरत आफ़रीं
क्या वफ़ा ओ जफ़ा की बात करें
दरमियाँ अब तो कुछ रहा भी नहीं
-ज़ाहीदा हिना
माना कि मैं हज़ार फ़सीलों में क़ैद हूँ
लेकिन कभी ख़ुलूस से मुझ को बुला के देख
-नसीम निकहत
दुखों के रूप बहुत और सुखों के ख़्वाब बहुत
तिरा करम है बहुत पर मिरे अज़ाब बहुत
-तनवीर अंजुम
फूलों की ज़द में आ के कहीं जान से न जाए
मैं ने इसी ख़याल से तितली उड़ाई है
-नील अहमद
क्या कहूँ उस से कि जो बात समझता ही नहीं
वो तो मिलने को मुलाक़ात समझता ही नहीं
-फ़ातिमा हसन
ख़्वाबों पर इख़्तियार न यादों पे ज़ोर है
कब ज़िंदगी गुज़ारी है अपने हिसाब में
-फ़ातिमा हसन
सुनती रही मैं सब के दुख ख़ामोशी से
किस का दुख था मेरे जैसा भूल गई
-फ़ातिमा हसन
एक इसी बात का था डर उस को
मुझ में इंकार की भी हिम्मत थी
-पूजा भाटिया
आजिज़ी आज है मुमकिन है न हो कल मुझ में
इस तरह ऐब निकालो न मुसलसल मुझ में
-नुसरत मेहदी
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