पहुँच कर शब की सरहद पर उजाला डूब जाता है
न हो जिस का कोई वो बे-सहारा डूब जाता है
- ग़यास अंजुम
देखिए तो है उजाला ही उजाला
सोचिए तो तीरगी चारों तरफ़ है
- मासूम अंसारी
फिर उजाला ही उजाला नज़र आता है 'सिराज'
दिल हो बेदार तो दुनिया में कभी शाम नहीं
- सिराज लखनवी
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