पहुँच कर शब की सरहद पर उजाला डूब जाता है
न हो जिस का कोई वो बे-सहारा डूब जाता है
- ग़यास अंजुम
देखिए तो है उजाला ही उजाला
सोचिए तो तीरगी चारों तरफ़ है
- मासूम अंसारी
फिर उजाला ही उजाला नज़र आता है 'सिराज'
दिल हो बेदार तो दुनिया में कभी शाम नहीं
- सिराज लखनवी
उजाला ही उजाला रौशनी ही रौशनी है
अँधेरे में जो तेरी आँख मुझ को देखती है
- दानियाल तरीर
चराग़ाँ कर के दिल बहला रहे हो क्या जहाँ वालो
अंधेरा लाख रौशन हो उजाला फिर उजाला है
- अली अहमद जलीली
हम उजाला हैं उजालों से मोहब्बत है हमें
फ़न्न-ए-तख़्लीक़ तिरी शान बदल कर देखें
- रूमाना रूमी
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