गुलज़ार साहब की 20 नज़्में जो दिल को छू लेंगी

गुलज़ार साहब की 20 नज़्में जो दिल को छू लेंगी
                
                                                             
                            

सुकृता पॉल के शब्दों में ‘गुलज़ार साब अपनी नज़्मों में सीधे-सादे शब्दों से चौंका देेने वाली तस्वीरें गढ़ते हैं। कहीं तो पढ़ने वालों को अचानक काग़ज़ पर भारी-भरकम ख़याल दफनाये मिलते हैं और कहीं दिखाई देते हैं कर्ज़ की मिट्टी चबाते हुए किसान जो ख़ुदकुशी कर बैठते हैं। एक के बाद एक जैसी ये नन्ही मुन्नी नज़्में अंदर उतरती हैं जीने की लम्बी और गहरी कहानी आहिस्ते- आहिस्ते उभरने लगती है और फिर कोसों लम्बा सफ़र तय कर डालने का ढाढस मिलता है।’

पेश हैं गुलज़ार साहब की लिखी कुछ चुनिंदा नज़्में

मैं अगर छोड़ न देता, तो मुझे छोड़ दिया होता, उसने
इश्क़ में लाज़मी है, हिज्रो- विसाल मगर
इक अना भी तो है, चुभ जाती है पहलू बदलने में कभी
रात भर पीठ लगाकर भी तो सोया नहीं जाता


बीच आस्मां में था
बात करते- करते ही
चांद इस तरह बुझा
जैसे फूंक से दिया
देखो तुम…
इतनी लम्बी सांस मत लिया करो

आगे पढ़ें

गुलज़ार की नज़्में...

2 years ago
Comments
X