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कविताओं से जीवन को 'मुक्ति' देने वाले मुक्तिबोध को अपने से कभी मोह नहीं रहा

गजानन माधव मुक्तिबोध
                
                                                         
                            कविताओं से जीवन की उलझनें स्पष्ट करने वाले गजानन माधव मुक्तिबोध अखंड भाव लिए हुए ब्रह्मांड से टकराने वाले दैदीप्यमान नक्षत्रीय कवि के रूप में हिंदी साहित्य में जाने जाते हैं।  प्रसिद्ध साहित्यकार श्रीकांत वर्मा ने लिखा है कि गजानन माधव मुक्तिबोध को दूसरों से या अपनों से जो भी मोह रहा हो, अपने से उन्हें मोह कभी नहीं रहा। किसी और कवि की कविताएं उसका इतिहास न हों, मुक्तिबोध की कविताएं अवश्य उनका इतिहास कही जा सकती हैं। जो उनकी कविताओं को समझेंगे उन्हें मुक्तिबोध को किसी और रूप में समझने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिंदगी के एक-एक स्नायु के तनाव को एक बार जीवन में और दूसरी बार अपनी कविताओं में जीकर मुक्तिबोध ने अपनी स्मृति के लिए कई सारी कविताएं छोड़ी हैं। ये कविताएं ही उनका जीवन वृतांत हैं।
                                                                 
                            

समस्या एक-
मेरे सभ्य नगरों और ग्रामों में
सभी मानव
सुखी सुंदर व शोषणमुक्त
कब होंगे ?
(चकमक की चिनगारियां, चांद का मुंह टेढ़ा है)

बशर्ते तय करो, किस ओर हो तुम, अब
सुनहले उर्ध्व आसन के
दबाते पक्ष में, अथवा
कहीं उससे लुटी टूटी
अंधेरी निम्न कक्षा में तुम्हारा मन,
कहां हो तुम ?
(चकमक की चिनगारियां, चांद का मुंह टेढ़ा है)



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6 वर्ष पहले

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