कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो
- दुष्यंत कुमार
बदलती जा रही है दिल की दुनिया
नए दस्तूर होते जा रहे हैं
- शकील बदायुनी
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