संसद में हर साल वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किया जाता है जिसका प्रभाव पूरे देश पर पड़ता है। बजट यानी आपके पास जितने संसाधन और धन हैं उनके अनुसार ही अपना विकास करना। देश के साथ-साथ लोग अपने पास मौजूद रूपए-पैसों का भी बजट बनाते हैं। इसी रुपए और पैसों पर शायरों का क्या कहना है जाने इन शायरी के साथ
सिफ़ारिश का भरोसा भी नहीं है
मगर पैसा बराबर बोलता है
- नज़ीर मेरठी
मेहनत से पैसा मिलता है
जैसे को तैसा मिलता है
- ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
आगे पढ़ें
सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना
कमेंट
कमेंट X