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कौन थे फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ जिनकी नज़्म पर हो रहा है इतना विवाद

Faiz Ahmed Faiz Nazm Poem is in controversy
                
                                                         
                            मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म 'हम देखेंगे' इन दिनों विवाद में है, इस नज़्म पर आरोप है कि यह सांप्रदायिक है और इसे कटघरे में खड़ा कर दिया गया है। फ़ैसले के लिए आईआईटी कानपुर को चुना गया है। उनके द्वारा एक समिति का गठन किया गया है जो यह बताएगी कि इस नज़्म पर लगे आरोप ठीक हैं या शायर को इससे बरी किया सकता है। 
                                                                 
                            

इसकी शुरुआत पाकिस्तान से हुई जब तत्कालीन ज़िया-उल-हक़ की सरकार द्वारा साड़ी को बैन कर दिया गया था। तब सन् 1986 में इक़बाल बानो ने लगभग 50,000 लोगों की भीड़ के सामने साड़ी में यह नज़्म गायी थी। जैसे ही इसकी पंक्ति आयी 'सब ताज उछाले जाएंगे, सब तख़्त गिराए जाएंगे' वैसे ही खचाखच भरे उस हॉल में 'इंक़लाब ज़िंदाबाद' के ख़ूब नारे लगे। तब से यह नज़्म सरकार का विरोध करने वालों की आवाज़ बन गयी।

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कौन थे फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

6 वर्ष पहले

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