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चुनाव के मौसम में पढ़ें ये नज़्में

Election 2019 nazm on elections
                
                                                         
                            

साहित्य और सियासत का एक दूसरे से गहरा संबंध है। सियासी उथल-पुथल हमेशा से कवि व लेखकों को कलम उठाने के लिए मजबूर कर देती है। इसलिए शायरों ने सियासत पर ख़ूब नज़्में लिखी।
 

मज़हब और सियासत
दोनों
नए नए नारे रटते हैं
बहुत से शहरों
बहुत से मुल्कों से
अब चल कर
नज़्म मेरे घर जब आती है
इतनी ज़ियादा थक जाती है
मेरे लिखने की टेबल पर
ख़ाली काग़ज़ को
ख़ाली ही छोड़ के रुख़्सत हो जाती है

- निदा फ़ाज़ली

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7 वर्ष पहले

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