आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चुनाव के मौसम में पढ़ें ये नज़्में

Election 2019 nazm on elections
                
                                                         
                            

साहित्य और सियासत का एक दूसरे से गहरा संबंध है। सियासी उथल-पुथल हमेशा से कवि व लेखकों को कलम उठाने के लिए मजबूर कर देती है। इसलिए शायरों ने सियासत पर ख़ूब नज़्में लिखी।
 

मज़हब और सियासत
दोनों
नए नए नारे रटते हैं
बहुत से शहरों
बहुत से मुल्कों से
अब चल कर
नज़्म मेरे घर जब आती है
इतनी ज़ियादा थक जाती है
मेरे लिखने की टेबल पर
ख़ाली काग़ज़ को
ख़ाली ही छोड़ के रुख़्सत हो जाती है

- निदा फ़ाज़ली

सियासत की फ़ुसूँ-साज़ी
तिजारत की ज़ियाँ-कारी
हवस की गर्म-बाज़ारी
किसी अय्यार-ए-क़ुव्वत की जहाँ-दारी
में दम घुटता है

- साजिदा ज़ैदी

आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर