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'इश्क़ में मिले फरेब' पर कहे गए शेर...

इश्क़ में मिले फरेब तो शायरों ने कहे ये शेर.... 
                
                                                         
                            तू भी सादा है कभी चाल बदलता ही नहीं 
                                                                 
                            
हम भी सादा हैं इसी चाल में आ जाते हैं 
- अफ़ज़ल ख़ान

जो उन मासूम आँखों ने दिए थे 
वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ 
- फ़िराक़ गोरखपुरी

आदमी जान के खाता है मोहब्बत में फ़रेब 
ख़ुद-फ़रेबी ही मोहब्बत का सिला हो जैसे 
- इक़बाल अज़ीम

मेरे ब'अद वफ़ा का धोका और किसी से मत करना 
गाली देगी दुनिया तुझ को सर मेरा झुक जाएगा 
- क़तील शिफ़ाई

किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी 
ये हुस्न ओ इश्क़ तो धोका है सब मगर फिर भी 
- फ़िराक़ गोरखपुरी

तिरे वा'दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए 
कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए 
- फ़ना निज़ामी कानपुरी
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6 वर्ष पहले

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