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मौत पर ये हैं 18 बड़े शेर... 

मौत पर शेर
                
                                                         
                            जिंदगी और मौत के बीच हर कोई फासला चाहता है। लेकिन इसके बाद भी हर किसी को एक न एक दिन मौत आनी है। जिंदगी का एकमात्र सच मौत है। यह तीखा है, कड़वा है। पर यह जिंदगी के हसीन ख्वाब को जमीनी धरातल पर उतारता है। हम अपने पाठकों के लिए इसी मौत पर 18 बड़े शेर पेश कर रहे हैं। 
                                                                 
                            

माँगी थी एक बार दुआ हम ने मौत की
शर्मिंदा आज तक हैं मियाँ ज़िंदगी से हम
-अज्ञात


कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा
मैं तो दरिया हूँ समुंदर में उतर जाऊँगा
-अहमद नदीम क़ासमी

 

बला की चमक उस के चेहरे पे थी
मुझे क्या ख़बर थी कि मर जाएगा
-अहमद मुश्ताक़


अजल तो मुफ्त में बदनाम है जमाने में 
कुछ उनसे पूछ, जिन्हें जिंदगी ने मारा है
-फैज अहमद फैज 
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8 वर्ष पहले

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