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मासूम बचपन और ये 20 बड़े शेर....

childhood shayari
                
                                                         
                            लड़कपन में धूल-मिट्टी में खेलना, मिट्टी मुंह पर लगाना, मिट्टी में लेट जाना किसे नहीं याद है?  किसे यह याद नहीं है कि इसके बाद मां की प्यारभरी डांट-फटकार व रुंआसे होने पर प्यार भरा स्पर्श ! किसी भी लेखक या साहित्यकार से पूछ लीजिए। खासकर उससे जो बच्चों के लिए लिखता हो, हर कोई कहेगा कि बच्चों के लिए लिखना बहुत कठिन है, इसके बावजूद लिखा खूब गया है। शेरों-शाइरी की श्रृंखला में आज हम पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं 'बचपन' पर शायरों के अल्फ़ाज- 
                                                                 
                            

मेरे दिल के किसी कोने में, एक मासूम सा बच्चा
बड़ों की देख कर दुनिया, बड़ा होने से डरता है
 - राजेश रेड्डी

हज़ारों शेर मेरे सो गये काग़ज़ की क़ब्रों में
अजब माँ हूं कोई बच्चा मेरा ज़िन्दा नहीं रहता 
- बशीर बद्र

मेरा बचपन भी साथ ले आया

मेरा बचपन भी साथ ले आया
गांव से जब भी आ गया कोई
- कैफ़ी आज़मी

कोई स्कूल की घंटी बजा दे
ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है 
- शकील जमाली 

बचपन का हर नन्हा सपना
थक कर बूढ़ा हो कर लौटा
-अनिल अभिषेक
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मेरा बचपन भी साथ ले आया

8 वर्ष पहले

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