मासूम बचपन और ये 20 बड़े शेर....

childhood shayari
                
                                                             
                            लड़कपन में धूल-मिट्टी में खेलना, मिट्टी मुंह पर लगाना, मिट्टी में लेट जाना किसे नहीं याद है?  किसे यह याद नहीं है कि इसके बाद मां की प्यारभरी डांट-फटकार व रुंआसे होने पर प्यार भरा स्पर्श ! किसी भी लेखक या साहित्यकार से पूछ लीजिए। खासकर उससे जो बच्चों के लिए लिखता हो, हर कोई कहेगा कि बच्चों के लिए लिखना बहुत कठिन है, इसके बावजूद लिखा खूब गया है। शेरों-शाइरी की श्रृंखला में आज हम पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं 'बचपन' पर शायरों के अल्फ़ाज- 
                                                                     
                            

मेरे दिल के किसी कोने में, एक मासूम सा बच्चा
बड़ों की देख कर दुनिया, बड़ा होने से डरता है
 - राजेश रेड्डी

हज़ारों शेर मेरे सो गये काग़ज़ की क़ब्रों में
अजब माँ हूं कोई बच्चा मेरा ज़िन्दा नहीं रहता 
- बशीर बद्र
आगे पढ़ें

मेरा बचपन भी साथ ले आया

3 years ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X