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childhood shayari

काव्य चर्चा

मासूम बचपन और ये 20 बड़े शेर....

अमर उजाला, काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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लड़कपन में धूल-मिट्टी में खेलना, मिट्टी मुंह पर लगाना, मिट्टी में लेट जाना किसे नहीं याद है?  किसे यह याद नहीं है कि इसके बाद मां की प्यारभरी डांट-फटकार व रुंआसे होने पर प्यार भरा स्पर्श ! किसी भी लेखक या साहित्यकार से पूछ लीजिए। खासकर उससे जो बच्चों के लिए लिखता हो, हर कोई कहेगा कि बच्चों के लिए लिखना बहुत कठिन है, इसके बावजूद लिखा खूब गया है। शेरों-शाइरी की श्रृंखला में आज हम पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं 'बचपन' पर शायरों के अल्फ़ाज- 

मेरे दिल के किसी कोने में, एक मासूम सा बच्चा
बड़ों की देख कर दुनिया, बड़ा होने से डरता है
 - राजेश रेड्डी

हज़ारों शेर मेरे सो गये काग़ज़ की क़ब्रों में
अजब माँ हूं कोई बच्चा मेरा ज़िन्दा नहीं रहता 
- बशीर बद्र
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