भरोसा ऐसा शब्द है जिसके बिना जीवन में एक कदम भी आगे बढ़ पाना मुस्किल है लेकिन यह भी सच है धोखे जैसे शब्द भी भरोसे के साथ ही यात्रा करते हैं। जहां विश्वास है वहीं अविश्वास भी होता है। शायरों ने बड़ी बारीकी से ऐसे आहसासों में लफ़्ज भरे हैं। पेश है भरोसे पर शायरों के अल्फ़ाज़-
ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया
तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया
~दाग़ देहलवी
जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे
कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे
~आनंद नारायण मुल्ला
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