दुनिया में कुछ रिश्ते ऐसे हैं जो हमें ईश्वर की तरफ़ से नहीं मिलते बल्कि उन्हें हम ख़ुद अपनी ज़िंदग़ी के लिए चुनते हैं। उन्हीं में से एक रिश्ता है दोस्ती का, हम अपने दोस्त ख़ुद ही चुनते हैं। ये दोस्त हमारी खुशी में साथ नाचते हैं, तो ग़म में हाथ थामे रहते हैं। इन्हीं दोस्तों के नाम शायरों ने भी ख़ूब कलाम लिखे लेकिन जो लोग दोस्ती के नाम पर फ़रेब करते हैं उनकी वजह से सरल-मन शायर आहत भी हुए। इन्हीं जज़्बातों के उन्होंने अपनी कलम में उतारा है।
पेश हैं शायरों के दोस्ती पर लिखे शेर
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला
- बशीर बद्र
लोग डरते हैं दुश्मनी से तेरी
हम तेरी दोस्ती से डरते हैं
- हबीब जालिब
हटाए थे जो राह से दोस्तों की
वो पत्थर मेरे घर में आने लगे हैं
- ख़ुमार बाराबंकवी
हम को यारों ने याद भी न रखा
'जौन' यारों के यार थे हम तो
- जौन एलिया
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हटाए थे जो राह...
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