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ऐतिहासिक शहरों पर रचे गए ये हैं अब तक के श्रेष्ठ काव्य...

Best poetry on city
                
                                                         
                            मुंबई/गुलज़ार 
                                                                 
                            

रात जब मुंबई की सड़कों पर
अपने पंजों को पेट में लेकर 
काली बिल्ली की तरह सोती है 
अपनी पलकें नहीं गिराती कभी,--
साँस की लंबी लंबी बौछारें 
उड़ती रहती हैं खुश्क साहिल पर!

मुंबई/ सुधीर सक्सेना 

एक शहर
बिला नागा रोज
इंतज़ार करता है
लोकल का

एक शहर
लगभग दौड़ता हुआ
चढ़ता है लोकल में

एक शहर
भागता हुआ सा
उतरता है लोकल से

एक शहर आख़िरकार
समा जाता है
पहियों पर सवार एक बड़े शहर में।

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बनारस / केदारनाथ सिंह

8 वर्ष पहले

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