हिंदी साहित्य में सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने गूढ़ कविताओं की रचना कर कविता में 'दर्शन' का रहस्य पैदा कर दिया है। अज्ञेय कवि और शैलीकार थे। उनकी शब्द साधना ने हिंदी में कथा-साहित्य को एक महत्त्वपूर्ण मोड़ दिया। नई कविताओं में उनका योगदान काफी अहम है।
द्वार के आगे
और द्वार: यह नहीं कि कुछ अवश्य
है उन के पार-किन्तु हर बार
मिलेगा आलोक, झरेगी रस-धार।
बोलना सदा सब के लिए और मीठा बोलना।
मेरे लिए कभी सहसा थम कर बात अपनी तोलना
और फिर मौन धार लेना।
जागना सभी के लिए सब को मान कर अपना
अविश्राम उन्हें देना रचना उदास, भव्य कल्पना।
मेरे लिए कभी एक छोटी-सी झपकी भर लेना-
सो जाना : देख लेना
तडिद्-बिम्ब सपना।
कौंध-भर उस के हो जाना।
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