प्रसिद्ध शायर बशीर बद्र की याददाश्त दिनों दिन कमजोर होती जा रही है। मीडिया के अनुसार लोग जब उनके सामने उनकी ही नज्म बोलते हैं तो वह कुछ नज्म तो बोल देते हैं वहीं कुछ नज्मों से वह अनजान रहते हैं। बशीर बद्र उर्दू शायरी के बहुत बड़े हस्ताक्षर हैं। हम यहां उनके 18 मशहूर शेर पेश कर रहे हैं।
खुदा की इतनी बड़ी कायनात में मैंने
बस एक शख्स को मांगा मुझे वही ना मिला
फिर याद बहुत आयेगी ज़ुल्फ़ों की घनी शाम...
वो माथे का मतला हो कि होंठों के दो मिसरे
बचपन की ग़ज़ल ही मेरी महबूब रही है
फिर याद बहुत आयेगी ज़ुल्फ़ों की घनी शाम
जब धूप में साया कोई सर पर न मिलेगा
इस दर से उठोगे तो कोई दर न मिलेगा...
ये सोच लो अब आख़िरी साया है मुहब्बत
इस दर से उठोगे तो कोई दर न मिलेगा
कभी धूप दे, कभी बदलियाँ, दिल-ओ-जाँ से दोनों क़ुबूल हैं
मगर उस नगर में न क़ैद कर जहाँ ज़िन्दगी की हवा न हो
माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में...
ख़ुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में
माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में
तुम छत पे नहीं आये वो घर से नहीं निकला
ये चाँद बहुत लटका सावन की घटाओं में
फूलों की बदन वाली ख़ुशबू-सी अदाओं में...
इस शहर में इक लड़की बिल्कुल है ग़ज़ल जैसी
फूलों की बदन वाली ख़ुशबू-सी अदाओं में
दुनिया की तरह वो भी हँसते हैं मुहब्बत पर
डूबे हुए रहते थे जो लोग वफ़ाओं में
रोयेंगे बहुत लेकिन आंसू नहीं आयेंगे...
ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएंगे
रोयेंगे बहुत लेकिन आंसू नहीं आयेंगे
कह देना समंदर से हम ओस के मोती हैं
दरया कि तरह तुझ से मिलने नहीं आयेंगे
अब जो भी उठाएंगे मिल जुल के उठाएंगे...
वो धुप के छप्पर हों या छाओं कि दीवारें
अब जो भी उठाएंगे मिल जुल के उठाएंगे
जब साथ न दे कोई आवाज़ हमे देना
हम फूल सही लेकिन पत्थर भी उठाएंगे
और उसने धुप से बादल को क्यों मिलाया था...
कोई न जान सका वो कहाँ से आया था
और उसने धुप से बादल को क्यों मिलाया था
यह बात लोगों को शायद पसंद आयी नहीं
मकान छोटा था लेकिन बहुत सजाया था
मैं जिसके साथ यहाँ पिछले साल आया था...
वो अब वहाँ हैं जहाँ रास्ते नहीं जाते
मैं जिसके साथ यहाँ पिछले साल आया था
सुना है उस पे चहकने लगे परिंदे भी
वो एक पौधा जो हमने कभी लगाया था
किसी का हाथ हमारे लबों तक आया था...
चिराग़ डूब गए कपकपाये होंठों पर
किसी का हाथ हमारे लबों तक आया था
तमाम उम्र मेरा दम इसी धुएं में घुटा
वो एक चिराग़ था मैंने उसे बुझाया था
साभार-कविता कोश
आप भी यहां बशीर बद्र की हालत से रूबरू होइए...
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