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Akhtar Payami 5 best nazm

काव्य चर्चा

ख़ूब हँस लो मेरी आवारा-मिज़ाजी पर तुम... अख़तर पयामी की 5 बेहतरीन नज़्में

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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शनासाई

रात के हाथ पे जलती हुई इक शम-ए-वफ़ा
अपना हक़ मांगती है
दूर ख़्वाबों के जज़ीरे (टापू) में 
किसी रौज़न (रौशमदान) से 
सुबह की एक किरण झांकती है
वो किरण दरपए-आज़ार (दुख देने को आमादा) हुई जाती है
वो किरण फिर मेरी ग़मख़्वार (हमदर्द) हुई जाती है 

आओ किरणों को अंधेरों का कफ़न पहनाएं 
इक चमकता हुआ सूरज सर-ए-मक़तल (वधस्थल के पास) लाएं
तुम मेरे पास रहो
और यही बात कहो

आज भी हर्फ़-ए-वफ़ा बायस-ए-रुसवाई (रुसवाई का कारण) है
अपने क़ातिल से मेरी ख़ूब शनासाई (जान पहचान) है
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आवारा...

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