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'अदब' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

Adab shayari
                
                                                         
                            

अदब लाख था फिर भी उन की तरफ़
नज़र मेरी अक्सर रही देखती
- अज्ञात


अदब ही ज़िंदगी में जब न आया
अदब में इतनी मेहनत किस लिए है
- अता आबिद

अब इस से पहले कि रुस्वाई अपने घर आती
तुम्हारे शहर से हम बा-अदब निकल आए
- मुईद रशीदी


दूर बैठा ग़ुबार-ए-'मीर' उस से
इश्क़ बिन ये अदब नहीं आता
- मीर तक़ी मीर

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4 वर्ष पहले

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