अदब लाख था फिर भी उन की तरफ़
नज़र मेरी अक्सर रही देखती
- अज्ञात
अदब ही ज़िंदगी में जब न आया
अदब में इतनी मेहनत किस लिए है
- अता आबिद
अब इस से पहले कि रुस्वाई अपने घर आती
तुम्हारे शहर से हम बा-अदब निकल आए
- मुईद रशीदी
दूर बैठा ग़ुबार-ए-'मीर' उस से
इश्क़ बिन ये अदब नहीं आता
- मीर तक़ी मीर
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