वो चेहरा किताबी रहा सामने
बड़ी ख़ूबसूरत पढ़ाई हुई
बशीर बद्र
देखने के लिए इक चेहरा बहुत होता है
आंख जब तक है तुझे सिर्फ़ तुझे देखूंगा
शहरयार
कितने चेहरे लगे हैं चेहरों पर
क्या हक़ीक़त है और सियासत क्या
साग़र ख़य्यामी
एक चेहरे में तो मुमकिन नहीं इतने चेहरे
किस से करते जो कोई इश्क़ दोबारा करते
उबैदुल्लाह अलीम
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किस से करते जो कोई इश्क़ दोबारा करते
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