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तुम्हारी तृप्ति यदि मेरे हृदय की प्यास हो जाये: बलबीर सिंह 'रंग'

कविता
                
                                                         
                            तुम्हारी तृप्ति यदि मेरे हृदय की प्यास हो जाये
                                                                 
                            
उसी क्षण से मुझे जीवन सरस मधुमास हो जाये।

अभी तो पल रहे हैं विकल आँसू करुण गानों में,
अभी तो एक मीठी सी कसक उठती है प्राणों में,
बहुत संभव है कि कल यह प्यार का इतिहास हो जाये।
तुम्हारी तृप्ति...

प्रणय-गति मन्द कर दूँगा प्रलय को सजग आहट से,
गरल को अमर कर दूँगा सुधा की मुस्कुराहट से,
मुझे कुछ तो दया की दृष्टि का आभास हो जाये।
तुम्हारी तृप्ति...

किसी की भ्रांति से विश्वास मेरा हिल नहीं सकता,
तुम्हें मुझसा अभागा खोजने पर मिल नहीं सकता,
धरा को यदि नजर भर देख लूँ, आकाश हो जाये।
तुम्हारी तृप्ति...

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5 घंटे पहले

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