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विजय जोशी 'शीतांशु' की लघुकथा: जब नदी से कुँए दोस्ती की....

विजय जोशी 'शीतांशु' की लघुकथा: जब नदी से कुँए दोस्ती की....
                
                                                         
                            नदी के पास एक कुँआ था। जिस  कुँए से उसने दोस्ती कर ली। वर्षा ऋतु में तो दोनों की खूब निभी। दोनों के पास पर्याप्त रूप में जल-निधि थी। धीरे धीरे वर्षा ने अपना साम्राज्य समेटना आरम्भ कर, शरद-शिशिर को प्रकृति का दायित्व संभालने को दे दिया। प्रकृति तो खुशनुमा थी। लेकिन नदी का दायरा सिकुड़ने लगा था। फिर भी नदी की दोस्ती, कुँए से बरकरार रही। दोनों अपने अपने जल की उपस्थिति पर एक दूसरे का सहारा बन जाते। यानि नदी कुँए को जल दे देती। 
                                                                 
                            
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5 वर्ष पहले

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