आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मधुर प्रतीक्षा ही जब इतनी, प्रिय तुम आते तब क्या होता...

इंतजार
                
                                                         
                            हरिवंश राय बच्चन प्रेम और विश्वास के सरताज कवि हैं। उनकी रचनाओं में जीवन संघर्ष की संवेदनाएं सकारात्मक सोच के साथ व्यक्त की गई हैं। प्रेम की मखमली परिभाषा उनके काव्य में देखने को मिलती है। प्रेम के साप्ताहिक उत्सव के बीच हम आपको उनकी एक कविता से रूबरू करा रहे हैं। प्रेम की ऐसी मधुर कसक बच्चन के काव्य में अमूमन देखने को मिलती है। 
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

अभी-अभी सोई खोई-सी, सपनों में तारों पर सिर धर...

मौन रात इस भांति कि जैसे, कोई गत वीणा पर बज कर,
अभी-अभी सोई खोई-सी, सपनों में तारों पर सिर धर
और दिशाओं से प्रतिध्वनियां, जाग्रत सुधियों-सी आती हैं,
कान तुम्हारे तान कहीं से यदि सुन पाते, तब क्या होता?
 
आगे पढ़ें

अभी-अभी सोई खोई-सी, सपनों में तारों पर सिर धर...

8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर